सबद शोध पत्रिका

सबद

राष्ट्रीय, सहकर्मी-समीक्षित (पीयर-रिव्यूड) त्रैमासिक शोध पत्रिका

ISSN: Applied (Online) 
ISSN: Applied (Print)

Call For Paper - Volume - 1 Issue - 2 (April - June 2026)

“सबद” पत्रिका में आपका स्वागत है। 

शब्द, साहित्य और समकालीन विमर्श का सशक्त मंच

सबद एक राष्ट्रीय स्तर की साहित्यिक एवं वैचारिक शोध पत्रिका है, जो हिंदी भाषा, साहित्य, संस्कृति, समाज और समकालीन विमर्श के विविध आयामों को अभिव्यक्त करने हेतु एक सशक्त, मानक-आधारित और विश्वसनीय अकादमिक मंच प्रदान करती है। पत्रिका का उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाले शोध, गंभीर वैचारिक लेखन और रचनात्मक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करना है, ताकि साहित्य और समाज के बीच सार्थक संवाद स्थापित हो सके। सबद लेखकों, शोधार्थियों, शिक्षकों, प्राध्यापकों और साहित्य-चिंतकों को अपने विचारों और शोध निष्कर्षों को सुव्यवस्थित, प्रमाणिक और अकादमिक स्वरूप में प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान करती है।

इस पत्रिका का दृष्टिकोण बहुआयामी और अंतर्विषयक है। इसमें हिंदी साहित्य के विविध पक्षों, भाषा एवं भाषिक विमर्श, लोकसाहित्य, सांस्कृतिक अध्ययन, सामाजिक संरचना, समकालीन विचारधाराओं तथा मानवीय सरोकारों से जुड़े शोध आलेखों को प्राथमिकता दी जाती है। सबद का मानना है कि साहित्य केवल सौंदर्यबोध या कलात्मक अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना, वैचारिक जागरूकता और बौद्धिक परिवर्तन का प्रभावी उपकरण भी है। इसलिए पत्रिका में ऐसे लेखों को विशेष महत्व दिया जाता है जो समाज, संस्कृति और समय की जटिलताओं का विश्लेषण करते हुए नए विमर्श के द्वार खोलते हैं।

पत्रिका में प्रकाशित सामग्री चयनित और समीक्षित प्रक्रिया से होकर गुजरती है, जिससे शोध की गुणवत्ता, मौलिकता और संदर्भ-प्रामाणिकता सुनिश्चित की जा सके। मौलिक शोध आलेख, समीक्षा-लेख, वैचारिक निबंध तथा सामाजिक–सांस्कृतिक विषयों पर आधारित विश्लेषणात्मक लेखों का स्वागत किया जाता है। सबद अकादमिक नैतिकता, उद्धरण शुद्धता और बौद्धिक ईमानदारी को अत्यंत महत्वपूर्ण मानती है और प्रकाशन के प्रत्येक चरण में इन मानकों का पालन करती है।

आज के परिवर्तित सामाजिक और बौद्धिक परिदृश्य में “शब्द” केवल अभिव्यक्ति का साधन नहीं, बल्कि संवाद, प्रतिरोध, संवेदना और परिवर्तन का आधार बन चुका है। सबद इसी दृष्टि को केंद्र में रखते हुए उन रचनाओं और शोधपरक लेखों को मंच प्रदान करती है, जो गंभीर चिंतन को प्रेरित करें, प्रश्न उठाएँ और रचनात्मक बहस को आगे बढ़ाएँ। पत्रिका का लक्ष्य साहित्य को जीवन और समाज से जोड़ते हुए मानवीय मूल्यों, सांस्कृतिक संवेदनशीलता और सामाजिक यथार्थ को अकादमिक गहराई के साथ प्रस्तुत करना है। इस प्रकार सबद एक उत्तरदायी, गतिशील और विचारोन्मुख शोध मंच के रूप में निरंतर कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है।